Saturday, 27 August 2016

हनुमान चालीसा

हनुमान चालीसा
दोहा :
श्री गुरु चरन सरोज रज , निज मनु मुकुरु सुधारि /
बरनऊँ  रधुबर बिमल जासु , जो दायकु फल चारि //
बुद्धिहीन तनु जानिके , सुमिरौ पवन कुमार /
बल बुद्धि विद्द्या देहु मोहिं , हरहु कलेस बिकार //
चौपाई :
 जय हनुमान ज्ञान गुण  सागर / जय कपीस तिहुँ लोक उजागर //
राम दूत अतुलित बल धामा / अंजनि पुत्र पवनसुत नामा //
महाबीर बिक्रम बजरंगी / कुमति निवार सुमति के संगी //
कंचन बरन बिराज सुबेसा / कानन कुंडल कुंचित केसा //
हाथ ब्रज औ ध्वजा बिराजै / काँधे मूँज जनेऊ साजै //
संकर सुवन केसरीनंदन / तेज प्रताप महा जग बंदन //
बिद्यावान गुनी अति चातुर / राम काज करिबे को आतुर //
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया / राम लषन सीता मन बसिया //
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा /बिकट रूप धरि लंक जरावा //
भीम रूप धरि असुर सँहारे / रामचन्द्र के काज सँवारे //
लाय सजीवन लखन जियाये /श्रीरधुबीर हरषि उर लाये //
रधुपति कीन्ही बहुत बड़ाई / तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई //
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं / अस कहिं श्रीपति कंठ लगावैं //
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा /नारद सारद सहित अहीसा //
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते / कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते //
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा / राम मिलाय राज पद दीन्हा //
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना / लंकेस्वर भए सब जग जाना //
जग सहस्त्र जोजन पर भानू / लील्यो ताहि मधुर फल जानू  //
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं / जलधि लाँधि गये अचरज नाहीं //
दुर्गम काज जगत के जेते / सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते //
राम दुआरे तुम रखवारे / होत न आज्ञा बिनु पैसारे //
सब सुख लहै तुम्हारी सरना /तुम रच्छक काहू को डर ना //
आपन तेज सम्हारो आपै / तीनों लोक हाँक तें कांपै //
भूत पिसाच निकट नहिं आवै / महाबीर जब नाम सुनावै //
नासै रोग हरै सब पीरा /जपत निरन्तर हनुमत बीरा //
संकट तें हनुमान छुड़ावै / मन क्रम बचन ध्यान जो लावै //
सब पर राम तपस्वी राजा / तिन के काज सकल तुम साजा //
और मनोरथ जो कोइ लावै / सोइ अमित जीवन फल पावै //
चारों जग परताप तुम्हारा / है परसिद्ध जगत उजियारा //
साधु संत के तुम रखवारे / असुर निकंदन राम दुलारे //
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता / अस बर दीन जानकी माता //
राम रसायन तुम्हरे पासा / सदा रहो रधुपति के दासा //
तुम्हरे भजन राम को पावै / जनम जनम के दुख बिसरावै //
अंत काल रधुबर पुर जाई / जहाँ जन्म हरी-भक्त कहाई //
और देवता चित न धरई / हनुमत सेइ सर्ब सुख करई //
संकट कटै मिटै सब पीरा / जो सुमिरै हनुमत बलबीरा //
जै जै जै हनुमान गोसाई / कृपा करहु गुरु देव की नाई //
जो सत बार पाठ कर कोई / छुटहि बंदि महा सुख होई //
जो यह पढ़ै हुनमान चालीसा / होय सिद्धि साखी गौरीसा //
तुलसीदास सदा हरि चेरा / कीजै नाथ ह्रदय महँ डेरा //

दोहा : 
पवनतनय संकट हरन , मंगल मूरति रूप / राम लखन सीता सहित , हृदय बसहु सुर भूप //

// इति //

Wednesday, 24 August 2016

सहस्त्राक्षरी सिद्ध लक्ष्मी महाविद्या मन्त्र

सहस्त्राक्षरी सिद्ध लक्ष्मी महाविद्या मन्त्र
विनियोग : ॐ अस्य श्री सर्व महाविद्या महारात्रि गोपनीय मन्त्र रहस्याति मयी पराशक्ति श्री मदाद्या भगवती सिद्ध लक्ष्मी सहस्त्राक्षरी सहस्त्र रूपाणि महाविद्या श्री इन्द्र ऋषि गायत्र्यादी नानाछन्दांसि , नव कोटि शक्ति रूपा श्री मदाद्य भगवती सिद्ध लक्ष्मी देवता श्री मदाद्य सिद्ध लक्ष्मी प्रसादादखिलेष्टर्थ जपे पाठे विनियोगः /

मन्त्र : ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ह सौ श्रीं ऐं ह्रीं क्लीं सौ; सौ;ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं जय जय महालक्ष्मी,जगदाद्ये , विजये ,सुरा सुर त्रिभुवन निदाने , दयां करे सर्व देव तेजो रूपिणी विरंचि संस्थिते , विधि वरदे , सच्चिदानन्दे , विष्णु देह आवृते , महामोहिनी , नित्य वरदान तत्परे महा सुधाब्धि बासिनि , महातेजो धारिणी सर्वाधारे , सर्व कारण कारिणे , अचिन्त्य रुपे , इन्द्रादि सकल निर्जर सेविते , साम गान गायन परिपुणोदय कारिणी विजये  , जयन्ती अपराजिते , सर्व सुन्दरी , रकतांशुके ,सूर्य कोटि सकांशे , चंद्र कोटि सुशीतले  , अग्नि कोटि दहन शीले , याम कोटि वहन  शीले , ॐकार  नाद  विन्दु रूपिणी , निगमागम भागदायिनी , त्रिदश राज्य दायिनी , सर्व स्त्री रत्न स्वरूपिणी , दिव्य देहिनी , निर्गुणे सगुणे , सद  सद  रूप धारिणी , सुर वरदे , भक्त त्राण तत्परे , बहु बरदे , सहस्त्राक्षरे , अयुताक्षरे  सप्त कोटि लक्ष्मी रूपिणी , अनेक लक्ष लक्ष स्वरुपे अनन्त कोटि ब्रह्मांड नायिके चतुविशंति मुनि जन संस्थिते , चतुर्दश भुवन भाव विकारिने गगन वाहिनी , नाना मन्त्र राज विराजिते सकल सुन्दरी गण सेविते , चरणारबिंद्र , महात्रिपुर सुन्दरि , कामेशदयिते करुणा रस कल्लोलिनी , कल्प वृक्षादि स्थिते ,चिन्तामणि दव्य मध्यावस्थिते , मणि मन्दिरे निवासिनी , विष्णु वक्ष स्थल कारिणे , अजिते , अमले , अनुपम चरिते , मुक्ति क्षेत्राधष्ठायिनी प्रसीद प्रसीद , सर्व मनोरथान पूरय पूरय , सर्वारिष्टान छेदय छेदय सर्व ग्रह  पीड़ा ज्वराग्र भय विध्वंसय विध्वंसय , सर्व त्रिभुवन जातं वशय वशय , मोक्ष मार्गणी दर्शय दर्शय ज्ञान मार्ग प्रकाशय प्रकाशय , अज्ञान तमो नाशय नाशय , धन धान्यादि वृद्धि कुरु कुरु , सर्व कल्याणनि कल्पय कल्पय मां रक्ष रक्ष , सर्वायदभ्यो निस्तारय निस्तारय , वज्र शरीरं साधय साधय ह्री सहस्त्राक्षरी सिद्ध लक्ष्मी महा विद्यायै नमः /